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Umar Daraaj

bas itni jhijhak h ki: shikan si dikhti hai mathe pe meri aur kamal si khilti hai aankhe teri samay ke thapedo se shayad main haar jaun fir kaise khankegi paayal barso tak teri

Hindi Poem (हिंदी कविता ) - 21: Some of my favorites

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लिखा हुआ हर एक शब्द काल्पनिक है | इसका किसी भी व्यक्ति या वस्तु से वास्तविक सम्बन्ध नहीं है | अगर किसी व्यक्ति का इससे कोई वास्तविक सम्बन्ध पाया जाता है तो यह मात्र एक संयोग होगा | स्वार्थ बस इतना मांगता हूँ मैं जो भी करू खुश रहू मेरा परिवार खुश रहे मेरा देश प्रसंनित हो और संसार खुश रहे मेरा भला हो मेरे परिवार का भला हो भला हो देश का ये संसार फूले फले ========================================================================= कल कल किसी कहानी में समाज का चेहरा दिखेगा नहीं कोई कथाकार ऐसी शक्ल बुनेगा नहीं क्योंकि - वह इतना जान लेगा कि डरने लग गया है इन्सां अपने अक्स से अपने बिम्ब से वह स्वंयं को जानना चाहेगा नहीं और वह जियेगा सपनो में जागेगा नहीं ========================================================================= भावनाएं मैं या तो नहीं करता तुम्हारी परवाह; गर करता भी तो नहीं है व्यक्त करने की चाह; मुझे यकीं नहीं किसी पर भी ना तुम पर, ना अपने आप पर भी; पर इतना कह सकता हूँ मांगोगी तो - ये हस्ती है तेरे लिए ये मुस्कान तुम्हारी है, ये ...

Hindi Poem (हिंदी कविता ) - 22: कुछ शब्द जो अधूरे रह गए -2

भाग दौड़ भरे इस दौर में बचपन एवं बाल श्रम पर कुछ शब्द - फूल खिले है शाखों पर समां ज़रा महकाने दो मुरझाना भी जीवन है  पर पतझर को तो आने दो  - गौरव --------------------------------------------- कुछ ख्वाब के धागों से पिरोई जिंदगी है कुछ सागर के मोती सी संजोई जिंदगी है एक एक पल ख़ुशी का बटोर लेना खुद से वर्ना बुलबुलों की मानिंद खोई जिंदगी है - Gaurav --------------------------------------------- हम कभी तेरे हम दम ना थे ना कभी देखा था ख्वाब होने का फिर जालिम क्यों इलज़ाम लगाया मयकदे में तिर होने का - Gaurav --------------------------------------------- हाल तो ऐसे पूछती है वो जैसे कई दिनों से हंसने का बहाना नहीं मिला और हम है कि जीते जाते है जैसे जिंदगी में एक जमाना नहीं मिला - Gaurav -------------------------------------------- यूँ तो हम तुमसे अक्सर नज़र फेर लेते थे दिल के पंछी को हम ख्वाबो में पंख देते थे | वो तो बरसात ने किरकिरा कर दिया मौसमहम तो रेगिस्तां में नैय्या बहुत खेते थे  - Gaurav ----------------------------------------------...

Hindi Poem (हिंदी कविता ) - 19: वो मुस्कान बेचती है

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वो मुस्कान बेचती है कुछ मुलाकात के बाद फिर सवाल आया उसके पेशे पर  न कह सकी कि वो मुस्कान बेचती है   This is my shortest poem till now and still it tells me so many things. Given below is a Drawing I drew in 2007 which might be close to these words. For whom this poem is written is up to you to guess.

Hindi Poem (हिंदी कविता ) - 17:

मायूस ना हो मालूम होता है गिरने लगे है पत्ते नग्न हो चुकी कुछ शाखे है मायूस ना हो इस पतझर से बहारो के आने की हमने सुनी कुछ बाते है ========================================= स्वार्थ बस इतना मांगता हूँ मैं जो भी करू खुश रहू मेरा परिवार खुश रहे मेरा देश प्रसंनित हो और संसार खुश रहे मेरा भला हो मेरे परिवार का भला हो भला हो देश का ये संसार फूले फले ========================================= सीधे साधे शब्द सीधे साधे शब्द है सीधी सी मेरी कविता है सीधी है ......(जलेबी) और सीधे से ही हम है परेशां है हम दिल से प्यार करना मुश्किल नहीं नफरत करना मुश्किल है ये दिल बड़ा कातिल है कि फूल देखा नहीं मोहब्बत पहले कर बैठता है और मना करो तो छुईमुई कि भांति एठ्ता है ........... लिखा हुआ हर एक शब्द काल्पनिक है | इसका किसी भी व्यक्ति या वस्तु से वास्तविक सम्बन्ध नहीं है | अगर किसी व्यक्ति का इससे कोई वास्तविक सम्बन्ध पाया जाता है तो यह मात्र एक संयोग होगा | ============================================== वजह - Reason हाँ इसकी वजह कई है उनमे से एक यही है तुमसे ...

Hindi Poem (हिंदी कविता ) - Favorites

By उत्पल बैनर्जी हमने ऐसा ही चाहा था कि हम जियेंगे अपनी तरह से और कभी नहीं कहेंगे मजबूरी थी हम रहे गोरैयो कि तरह अलमस्त अपने छोटे से घर को कभी ईंट पत्थरो का नहीं मानेंगे उसमे हमारे स्पंदनो का कोलाहल होगा दुःख सुख इस तरह आया जाया करेंगे जैसे पतझर आता है, बारिश आती है कड़ी धुप में दहकेंगे हम पलाश कि तरह तो कभी प्रेम में पगे बह चलेंगे सुदूर नक्षत्रो के उजास में हम रहेंगे बीज की तरह अपने भीतर रचने का उत्सव लिए निदाघ में तपेंगे, ठिठुरेंगे पूस में अंधड़ हमें उदा ले जायेंगे, सुदूर अनजानी जगहों पर जहां भी गिरेंगे, वहीँ उसी मिटटी की मधुरिमा में खोलेंगे आँख हारे या जीते हम मुकाबला करेंगे समय के थपेड़ो का उम्र की तपिश में झुलस जायेगा रंग रूप लेकिन नहीं बदलेगा हमारे आंसुओ का स्वभाव नेह का रंग...वैसी ही उमंग हथेलियों की गर्माहट आँखों में चंचल धुप की मुस्कराहट कि मानो कहीं कोई अवसाद नहीं हाहाकार नहीं, रुदन नहीं अधूरी कामनाओं का तुम्हे याद होगी हमंत की एक रात प्रतिपदा की चंद्रिमा में हमने निश्चय किया था अपनी अंतिम सांस तक इस तरह जियेंगे हम की मानो जीवन में मृत्यु है ही नह...

Hindi Poem (हिंदी कविता ) - 17: ख्वाब

कलियों में कभी मुस्कायेंगे पतझर में मुरझायेंगे भी कभी बिजली कभी रौशनी कभी भंवरा कभी कली कभी चिडियों  की तरह चह्केंगे कभी उपवन सा महकेंगे कभी मिट्टी की तरह मिटेंगे मिटेंगे, मिटकर नया बनेंगे कभी बादल की तरह बरसेंगे चकोर की तरह भी हम तरसेंगे - गौरव

Hindi Poem (हिंदी कविता ) - 16: कल / डर

कल किसी कहानी में समाज का चेहरा दिखेगा नहीं कोई कथाकार ऐसी शक्ल बुनेगा नहीं क्योंकि - वह इतना जान लेगा कि डरने लग गया है इन्सां अपने अक्स से अपने बिम्ब से वह स्वंयं को जानना चाहेगा नहीं और वह जियेगा सपनो में जागेगा नहीं

Hindi Poem (हिंदी कविता ) - 15: कुछ शब्द जो अधूरे राह गए

First, all the things I write here does not necessarily relate to me. कि अर्ज़ किया है जमाने में अनजान सिर्फ हम ही नहीं है अँधेरे में डूबे कई और लोग भी है कि हम नादाँ को करते हो क्यों परेशां इस महफ़िल में तिरे आशिक कई और भी है|| ---------------------------------------------------------------------- है भीड़ बहुत वीराने में, इक दो राख हो जाए तो क्या है वजूद तिरा इत्ता सा, जो ख़ाक हो जाए तो क्या है ---------------------------------------------------------------------- ओस की बुँदे गल रही थी, धुंध पानी की घास पे चल रही थी झील किनारे बैठा था मैं, ना जाने वो क्यूँ मचल रही थी ---------------------------------------------------------------------- अब उस की मर्जी किस को किस रंग में रंगता है सोचा तो था इस घरोंदे को घर बनायेंगे हम देखना है घर बनता है, या खँडहर बनता है? hum sab shuru me chahte to yahin the ki desh ko ghar banaye par end me kya hoga kisi ko pataa nahin koi foreign chalaa jaayega koi badaa officer is dekh ko khokla karega aur kai kuch aur (koi kya pataa achcha k...

Hindi Poem (हिंदी कविता ) - 14:

वचन बद्धता मैं या तो नहीं करता तुम्हारी परवाह; गर करता भी तो नहीं है व्यक्त करने की चाह; मुझे यकीं नहीं किसी पर भी ना तुम पर, ना अपने आप पर भी; पर इतना कह सकता हूँ मांगोगी तो - ये हस्ती है तेरे लिए ये मुस्कान तुम्हारी है, ये वजूद है तेरा, ये जान तुम्हारी है" ये मेरे वचन बद्धता है अब तो मैं अपनी भी नहीं सुनूंगा ================================================= क्यों हो गया आज आसमां शराबी है ये कोई जादू या मेरे दिल की खराबी क्यों हो गया आज आसमां शराबी यूँ तेरी जुल्फें जो लहराई क्यों है काली घटा छाई क्यों शर्माए ये फूल देख तेरे होंठ गुलाबी है ये कोई जादू या मेरे दिल की खराबी क्यों हो गया आज आसमां शराबी चेहरे के तुम्हारे, सामने ये चाँद काला हो गया धीरे से तुम जो मुस्काई शब् में उजाला हो गया जाती हो कहाँ तुम पलभर में ना की है अभी तो गुस्ताखी है ये कोई जादू या मेरे दिल की खराबी क्यों हो गया आज आसमां शराबी ========================================= ये मेरा देश है  जैसे विदेश है हिंदी है वतन की भाषा मेरी अंग्रेजी मैं बोलता हूँ अंग्रेजी में न...

Hindi Poem (हिंदी कविता ) - 13: INTERN एक इन्टर्न को भी जीने का अधिकार है

ये ना करो, ये अत्याचार है एक इन्टर्न को भी जीने का अधिकार है साला, सुबह आठ बजे बुलाते है शाम पांच तक पकाते है और नेट की स्पीड बेकार है एक इन्टर्न को भी जीने का अधिकार है क्या चाहते है पता नहीं बस फंडे पेलते जाते है हम सुने परवाह नहीं, बस अपनी धुनी रंवाते है एक इन्टर्न को भी जीने का अधिकार है रूपये दे रहे दस हज़ार "वर्क वैलू" चाहिए पचास हज़ार बोलते है "रेज़रफिश" लेवल की साईट बनाओ हम बना देंगे १०, बीस लाख देके बताओ खाना तो ऐसे चाहते है मानो हम अचार है एक इन्टर्न को भी जीने का अधिकार है

Hindi Poem (हिंदी कविता ) - 10: जाएं तो जाएं हम किधर जाए

जाएं तो जाएं हम किधर जाए, इसी मुश्किल में महफ़िल सजाये जिए तो जिए कैसे बिन तेरे जैसे बिन पानी जीवन जी जाये मायने बदल गए कई रिश्तो के दोस्तों को , उनको पहचाना जाए मंहगे हुए आम इसी बहाने चुराने आम आमबाग जाए पौधे बोये थे मैंने कुछ दिन पहले सुन्दर सुहावने आज कुछ फूल आये |

Hindi Poem (हिंदी कविता ) - 9: आज का इंसान

मैं खुश हूँ या नहीं वो खुश नहीं होगा तभी मैं खुश रहूँगा सब के सर पर पाँव रख कर मैं अपनी मंजिल चधुन्गा काम ऐसा कर जाऊं खुदा की आँखे भर जाए देख मेरी इंसानियत हैवान भी डर जाए करू कुछ ऐसा की खून की हो वैसाखी ऐसा ही शैतान हूँ मैं हूँ मैं इंसान या फिर कोई हैवान हूँ मैं

Hindi Poem (हिंदी कविता ) - 8: मन

हो जाऊँ कभी मैं तेज (बिजली) सा सूरज की तेज किरण सा घुमु मैं कहीं भी हो घर मेरा मधुवन सा राज करू जहां पर मैं कहलाऊँ मैं भगवन सा जो चाहू वो मिल जाए वो … जाए वो जी जाए झूमु कभी मैं सावन सा कभी सोचता हूँ दोडू भागु कस्तूरी के लिए जैसे वन में कोई हिरन सा कभी कहीं खो जाऊँ मैं आसमा के तारो जैसे चमकू कभी मैं टिम टिम सा कभी होते हुए भी नहीं दिखु चन्दा सा कोई अमावस का कभी कुबेर बनू मैं तो कभी पतझर के वन सा भूखा रहूँ मैं पैदल चलू मैं धीमा हो जाऊं मैं पल पल सा चाहत है या कोई समंदर मन क्या मेरा चितवन सा.

Hindi Poem (हिंदी कविता ) : अपरंपरागत कविताये

--------------------------------------------- हमने जो राह चुनी है, उसमे कई तुम्हारे जैसे आयेंगे गर तुमसे नाराज हो गए तो हम बाकी से कैसे निभाएंगे -- Gaurav --------------------------------------------- पता नहीं तू ग़मगीन है या ख़ुशी से सठिया गया है जो भी हो उसमे में शरीक होंगे भी हम और नहीं भी -- Gaurav --------------------------------------------- सलटना न जाने इतना क्यों मदहोश था मैं रात की बात से या आज की मुलाक़ात से जो भी था बड़ी जोर से धड़का था दिल बड़ी मुस्किल से संभला था दिल इक ख़याल से दुनिया बदल जाती वो गलती सलट जाती -Gaurav --------------------------------------------- इस एक चित्र के हजारो अर्थ है और हजारो अर्थो का कोई अर्थ नहीं जो एक अर्थ से तू मिल जाए तो समझ तेरा जीवन व्यर्थ नहीं - Gaurav --------------------------------------------- हर एक, दो शब्द होता है एक चले, दूजे का क्या काम  Gaurav ------------- जब हम ना होंगे, जब हमारी खांक पे तुम रुकोगे चलते चलते अश्कों से भीगी चांदनी में एक सदा सी सुनो गे चलते चलते - not mine ------...