जानवरों से प्यार

 आज जो हुआ उसपे मुझे प्यार भी आया और थोड़ा भविष्य के बारे में अनुमान भी लगा कि क्या क्या होने वाला है। यह expected तो था पर इतनी जल्दी नहीं । हुआ ये कि आज हमारी बेटी पड़ोस से कुछ कुत्ते के छोटे छोटे बच्चे उठा कर घर में ले आई । एक - दो घंटे खेली भी पर रात हो चुकी तो और घर वालो को सोना भी था तो कुत्ते के बच्चों को बाहर भेज के आ गए । इसके बाद इतनी छोटी सी जान ने जो रोना शुरू किया पूरा परिवार मनाने की कोशिश में लग गया पर रुके नहीं चाहिए तो वो ही । लोग stuffed toy लाकर दे या फिर खुद मुंह से कुत्ते की आवाज निकाले उससे वो कुत्ते ही चाहिए । मुझे भी video call किया गया, मैने भी कोशिश की पर नाकामियत ही हाथ लगी । उदयपुर में उसके साथ 3 दिन रहा पर मुझे छोड़ने पर बिल्कुल नहीं रोई । 

जब किसी से नहीं मानी तो उसको छोड़ दिया कि जा कर मिल लो तो जल्दी से भागकर बाहर आ गई और ढूंढने लगी उन बच्चों को । उसको फिर से बोलकर अंदर लाए कि अब वो चले गए है, ये सुनकर रोती हुई अंदर आई और रोते हुए सो गई।

ये सभी बच्चों के साथ होता होगा पर मुझे लगता था कि 2-3 साल के बाद जानवरों से प्यार होता होगा, मेरी बेटी का तो 1 साल में ही ये हाल है । पता नहीं, बाद में कितने




जानवरों से प्यार होगा और कितने घर में आयेंगे ।

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