Hindi Poem (हिंदी कविता ) - 8: मन

हो जाऊँ कभी मैं तेज (बिजली) सा
सूरज की तेज किरण सा
घुमु मैं कहीं भी
हो घर मेरा मधुवन सा
राज करू जहां पर मैं
कहलाऊँ मैं भगवन सा
जो चाहू वो मिल जाए
वो … जाए वो जी जाए
झूमु कभी मैं सावन सा
कभी सोचता हूँ दोडू भागु
कस्तूरी के लिए जैसे
वन में कोई हिरन सा
कभी कहीं खो जाऊँ मैं
आसमा के तारो जैसे चमकू
कभी मैं टिम टिम सा
कभी होते हुए भी नहीं दिखु
चन्दा सा कोई अमावस का
कभी कुबेर बनू मैं तो
कभी पतझर के वन सा
भूखा रहूँ मैं
पैदल चलू मैं
धीमा हो जाऊं मैं
पल पल सा
चाहत है या कोई समंदर
मन क्या मेरा चितवन सा.

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